यूनियन कार्बाइड

   

"दिल पर उभरा एक अनोखा घाव 'अतीक़'

कितने पुराने ज़ख़्मों की बू-बास लिए।"


अतीक़ अहमद अतीक़, के ग़ज़ल की ये पंक्तियां मुझे मध्यप्रदेश में चल रही हलचल की ओर खींच लाई। 


भोपाल गैस त्रासदी का वो खौफनाक मंजर, जिसने भारत के हृदय मध्यप्रदेश को हिला कर रख दिया, साथियों जरा, सोचिए क्या ही भयावह दृश्य रहा होगा। जिसने आधी रात को हजारों को मौत की नींद सुला दिया।


यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के पास से गुजरते हुए हर एक भोपाली को उसकी विषाक्त यादें ज़हन में आना कोई अचरज की बात नहीं है। ये वही फैक्ट्री है जिसमें से विषाक्त गैस (MIC) मिथाइल आइसो साइनाइड का रिसाव हुआ था। इसका उपयोग कीटनाशक वह प्लास्टिक बनाने में किया जाता था।

उसी भोपाल गैस कांड के 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड कारखाने का 337 टन जहरीला कचरा गुरुवार को तड़के इंदौर के पास स्थित पीथमपुर की एक औद्योगिक अपशिष्ट निपटान इकाई में पहुंचा दिया गया। 

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जहरीले अपशिष्ट को 12 सीलबंद कंटेनर ट्रकों में भोपाल से 250 किलोमीटर दूर धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की अपशिष्ट निपटान इकाई में भेजा गया। एक निजी कंपनी द्वारा संचालित इस यूनिट के आस-पास बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

पाठकों, मैं आपको बता दूं कि ये दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदी में से एक थी, और इसने भोपाल को कभी ना भूलने वाला घाव दिया हैं। समस्या से तो सभी परिचित हैं फिर गौर करना जरूरी है कि गैस राहत विभाग के अनुसार, फैक्ट्री में लगभग 337 मीट्रिक टन ज़हरीला कचरा है, जिसमें SEVIN 85 S नाम का वो कीटनाशक भी है, जिसका उत्पादन भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में होता था।


आज इंदौर के आसपास और पीथमपुर में रहने वाले लोगों में भय का माहौल है। लोगों में अपशिष्ट को पीथमपुर में जलाने के लिए आक्रोश को स्पष्ट देखा जा सकता है। आत्मदाह की कोशिश है, स्कूली छात्रों का सड़कों पर आना, इंदौर में जगह - जगह जनता का आक्रोशित होना, आमरण अनशन होना, बंद का आवाहन, तिस पर तमाम विशेषज्ञों की यही राय है कि इन विषाक्त पदार्थ को यहाँ जलाना पूरे पीथमपुर और इंदौर शहर के लिए सुरक्षित नहीं है।


न्यायालय का यह फरमान की "एक महीने में इस विषाक्त कचरे को पूर्णतः निपटान कर दिया जाना"। एक बार फिर विचार योग्य नजर आता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार उन्होंने तकनीकी के विश्वास में आने के बाद ही यह निर्णय लिया है। परन्तु वो भी इससे संतुष्ट नजर नहीं दिखाई पड़ते। इस पर कई दल राजनीति की रोटियां भी सेक रहे हैं।


दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 में जिस रामकी कंपनी (आर ई सस्टेनेबिलिटी लिमिटेड) के इंसीनरेटर में यूनियन कार्बाइड का 10 टन कचरा ट्रायल के तौर पर जलाया गया था। उससे सटे 50 बीघा खेत पूरी तरह बंजर हो चुके हैं। लोगों को स्किन इंफेक्शन, श्वांस संबंधी परेशानियां हो रही हैं। आठ किमी दूर तक के किसान अब भी पूरी फसल नहीं ले पा रहे हैं। इतना भयानक नुकसान और भविष्य की चिंता ने जनसामान्य की शांति भंग कर रखी है और इससे प्रशासन की नींदें भी उड़ी हुई है।


अपशिष्ट निपटान करने वाली कंपनी ने अपनी सिद्धियों को दिखाया ही है। परन्तु, इस पुराने घाव को कुरेदना कहीं जनता के अहित का विषय न बन जाए। माननीय न्यायालय व वर्तमान सरकार को आनन फानन कार्य न करने की तथा अपने इस निर्णय पर पुनः विचार करने की सलाह हर मध्यप्रदेश निवासी दे रहा है।





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