लद्दाख की मांगें
बीते कुछ दिनों से मर्तबान में पड़ी मेरी कलम की स्याही जमने ही लगी थी, कि फिर कुछ हृदयविदारक घटनाओं ने मुझे अपनी खटिया से खड़ा होने पर विवश कर दिया। वो दिन दूर नहीं की एक हिंदू अमित नाम के लड़के ने मुस्लिम आमिर नाम के लड़के के साथ सोशल मीडिया पर फोटो भर डाल दी तो वो देशद्रोही बन जायेगा। पिछले 70 वर्षों का डेटा निकलूं तो मीडिया की चाटुकारिता आज चरम पर है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। बुद्धिजीवियों के वर्ग ने खुद को बुद्धू कहना स्वीकार कर लिया है। रेप करने वाले को "बेल" और अपने हक की बात करने वालों को "जेल" भेजा जा रहा है। आज, शांति पूर्वक विरोध करने वाले बेरोजगार विद्यार्थियों को पीटा जा रहा है , शिक्षक जो अपने विद्यार्थियों के लिए आवाज उठा रहे हैं उन्हें जेल में डाल दिया जा रहा है, किसानों की तो कुचल कर हत्या तक कर दी गई है, हंसदेव जैसे जंगल कोयले खनन की लालच में फूंक दिए जा रहे हैं, बिहार में हजारों एकड़ जमीन को वहां के लोगों के विरोध के बावजूद तबाह कर किया जा रहा है। इन सब विरोध के समयावधि में ही आज सोनम वांगचुक के 14 दिनों के अनशन के ...