लद्दाख की मांगें
बीते कुछ दिनों से मर्तबान में पड़ी मेरी कलम की स्याही जमने ही लगी थी, कि फिर कुछ हृदयविदारक घटनाओं ने मुझे अपनी खटिया से खड़ा होने पर विवश कर दिया।
वो दिन दूर नहीं की एक हिंदू अमित नाम के लड़के ने मुस्लिम आमिर नाम के लड़के के साथ सोशल मीडिया पर फोटो भर डाल दी तो वो देशद्रोही बन जायेगा।
पिछले 70 वर्षों का डेटा निकलूं तो मीडिया की चाटुकारिता आज चरम पर है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। बुद्धिजीवियों के वर्ग ने खुद को बुद्धू कहना स्वीकार कर लिया है। रेप करने वाले को "बेल" और अपने हक की बात करने वालों को "जेल" भेजा जा रहा है।
आज, शांति पूर्वक विरोध करने वाले बेरोजगार विद्यार्थियों को पीटा जा रहा है , शिक्षक जो अपने विद्यार्थियों के लिए आवाज उठा रहे हैं उन्हें जेल में डाल दिया जा रहा है, किसानों की तो कुचल कर हत्या तक कर दी गई है, हंसदेव जैसे जंगल कोयले खनन की लालच में फूंक दिए जा रहे हैं, बिहार में हजारों एकड़ जमीन को वहां के लोगों के विरोध के बावजूद तबाह कर किया जा रहा है। इन सब विरोध के समयावधि में ही आज सोनम वांगचुक के 14 दिनों के अनशन के बाद भी जब सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही थी तो ऐसे में विरोध का भड़क जाना लाज़मी था।
लद्दाख में आज कर्फ्यू का माहौल है, CRPF की गोली से 4 प्रदर्शनकारी असमय काल के गाल में समा गए, सोनम वांगचुक एक सम्माननीय सुविख्यात व्यक्ति हैं, जिन्होंने अनगिनत कार्य देशहित में किए, आज अपनी मांगों को लेकर लद्दाख से दिल्ली की यात्रा करना हो, या अनशन कर शांतिपूर्वक अपनी बातों को रखना हो उन्होंने अपनी मांगों को कई बार सरकार के समक्ष रखा है।
लद्दाख की मांगों पर गौर किया जाए तो वहां - लोगों की प्रमुख रूप से चार मांगे हैं। इनकी पहली मांग है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। दूसरी मांग है कि लेह और कारगिल को अलग लोकसभा सीट दी जाए। तीसरी मांग है कि छठी अनुसूची के तहत लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा दी जानी चाहिए चौथी मांग है कि सरकारी नौकरी में स्थानीय लोगों को शामिल किया जाए।
अलबत्ता कोई मांग ऐसी नहीं है जिसका वादा सरकार ने न किया हो, लद्दाखियों को अपनी सभ्यता और संस्कृति बचाने का पूरा अधिकार है। वे पिछले कुछ वर्षों से लगातार अपनी बातों को शांतिपूर्वक रख रहे है, अतः लद्दाख के लोगों की मांगों पर सरकार को निसंदेह विचार करना चाहिए और जायज मांग को जल्द से जल्द स्वीकार करना चाहिए।
Such an informative note.
ReplyDelete